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mahabharat 12.341.23-24h: पाण्डुकुमार! मैं सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की आत्मा हूँ। इसलिए मैं सर्वप्रथम अपनी आत्मा रुद्र की पूजा करता हूँ।   |   mahabharat अध्याय 12.341: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको अपने प्रभावका वर्णन करते हुए अपने नामोंकी व्युत्पत्ति एवं माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.341.23-24h 
अहमात्मा हि लोकानां विश्वेषां पाण्डुनन्दन॥ २३॥
तस्मादात्मानमेवाग्रे रुद्रं सम्पूजयाम्यहम्।
 
 
अनुवाद
पाण्डुकुमार! मैं सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की आत्मा हूँ। इसलिए मैं सर्वप्रथम अपनी आत्मा रुद्र की पूजा करता हूँ।
 
Pandukumar! I am the soul of the entire universe. That is why I first worship my own soul, Rudra. 23 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)