Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.341.22-23h: पाण्डुनन्दन! इन भगवान रुद्र को नारायण रूप में ही जानना चाहिए। पार्थ! प्रत्येक युग में उन देवाधिदेव महेश्वर की पूजा करने से सर्वशक्तिशाली भगवान नारायण की ही पूजा होती है। 22 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.341: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको अपने प्रभावका वर्णन करते हुए अपने नामोंकी व्युत्पत्ति एवं माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 341: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको अपने प्रभावका वर्णन करते हुए अपने नामोंकी व्युत्पत्ति एवं माहात्म्य बताना  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  12.341.22-23h 
नारायणात्मको ज्ञेय: पाण्डवेय युगे युगे।
तस्मिन् हि पूज्यमाने वै देवदेवे महेश्वरे॥ २२॥
सम्पूजितो भवेत् पार्थ देवो नारायण: प्रभु:।
 
 
अनुवाद
पाण्डुनन्दन! इन भगवान रुद्र को नारायण रूप में ही जानना चाहिए। पार्थ! प्रत्येक युग में उन देवाधिदेव महेश्वर की पूजा करने से सर्वशक्तिशाली भगवान नारायण की ही पूजा होती है। 22 1/2॥
 
Pandunandan! This Lord Rudra should be known only in the form of Narayana. Parth! By worshiping that Devadhidev Maheshwar in every era, only the all-powerful Lord Narayana is worshipped. 22 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)