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mahabharat 12.341.20-21: वे दोनों देवता जो समस्त प्राणियों को वर देते हैं, वे सृष्टि और संहार के निमित्त मात्र हैं। (वास्तव में वह सब भगवान की इच्छा से ही होता है।) इनमें संहारक रुद्र, कपर्दी (जटाधारी), समीतल, मुण्ड, श्मशान का सेवन करने वाले, घोर व्रत करने वाले, रुद्र, योगी, परम दारुण, दक्षयज्ञ-नाशक और भगनेत्रहरि आदि अनेक नाम हैं॥ 20-21॥   |   mahabharat अध्याय 12.341: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको अपने प्रभावका वर्णन करते हुए अपने नामोंकी व्युत्पत्ति एवं माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 341: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको अपने प्रभावका वर्णन करते हुए अपने नामोंकी व्युत्पत्ति एवं माहात्म्य बताना  »  श्लोक 20-21
 
 
श्लोक  12.341.20-21 
निमित्तमात्रं तावत्र सर्वप्राणिवरप्रदौ।
कपर्दी जटिलो मुण्ड: श्मशानगृहसेवक:॥ २०॥
उग्रव्रतचरो रुद्रो योगी परमदारुण:।
दक्षक्रतुहरश्चैव भगनेत्रहरस्तथा॥ २१॥
 
 
अनुवाद
वे दोनों देवता जो समस्त प्राणियों को वर देते हैं, वे सृष्टि और संहार के निमित्त मात्र हैं। (वास्तव में वह सब भगवान की इच्छा से ही होता है।) इनमें संहारक रुद्र, कपर्दी (जटाधारी), समीतल, मुण्ड, श्मशान का सेवन करने वाले, घोर व्रत करने वाले, रुद्र, योगी, परम दारुण, दक्षयज्ञ-नाशक और भगनेत्रहरि आदि अनेक नाम हैं॥ 20-21॥
 
Those two gods who grant boons to all living beings are merely the instruments of creation and destruction. (In reality, all that happens only by the will of God.) Among these, there are many names of Rudra the destroyer, Kapardi (wearing a hair tie), Samital, Munda, one who consumes cremation ground, one who observes fierce fast, Rudra, Yogi, Param Darun, Dakshayagya-destroyer and Bhagnetrahari etc. 20-21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)