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mahabharat 12.341.18: जब ब्रह्माजी का दिन समाप्त हो गया, तब उस क्रोधित भगवान के ललाट से उनके पुत्र रूप में प्रलयंकारी रुद्र प्रकट हुए ॥18॥   |   mahabharat अध्याय 12.341: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको अपने प्रभावका वर्णन करते हुए अपने नामोंकी व्युत्पत्ति एवं माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 341: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको अपने प्रभावका वर्णन करते हुए अपने नामोंकी व्युत्पत्ति एवं माहात्म्य बताना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.341.18 
अह्न: क्षये ललाटाच्च सुतो देवस्य वै तथा।
क्रोधाविष्टस्य संजज्ञे रुद्र: संहारकारक:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
जब ब्रह्माजी का दिन समाप्त हो गया, तब उस क्रोधित भगवान के ललाट से उनके पुत्र रूप में प्रलयंकारी रुद्र प्रकट हुए ॥18॥
 
When Brahmā's day was over, from the forehead of that angry god there appeared the destructive Rudra in the form of his son. ॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)