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mahabharat 12.341.15-16h: उन्हीं से समस्त सृष्टि और प्रलय आदि प्रकट होते हैं। वे ही तप, यज्ञ और यज्ञ हैं, वे ही पुरातन विराट पुरुष हैं, उन्हें अनिरुद्ध कहते हैं। उन्हीं से लोकों की उत्पत्ति और प्रलय होता है ॥15 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.341: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको अपने प्रभावका वर्णन करते हुए अपने नामोंकी व्युत्पत्ति एवं माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 341: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको अपने प्रभावका वर्णन करते हुए अपने नामोंकी व्युत्पत्ति एवं माहात्म्य बताना  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  12.341.15-16h 
तस्मात् सर्वा: प्रवर्तन्ते सर्गप्रलयविक्रिया:।
तपो यज्ञश्च यष्टा च पुराण: पुरुषो विराट्॥ १५॥
अनिरुद्ध इति प्रोक्तो लोकानां प्रभवाप्यय:।
 
 
अनुवाद
उन्हीं से समस्त सृष्टि और प्रलय आदि प्रकट होते हैं। वे ही तप, यज्ञ और यज्ञ हैं, वे ही पुरातन विराट पुरुष हैं, उन्हें अनिरुद्ध कहते हैं। उन्हीं से लोकों की उत्पत्ति और प्रलय होता है ॥15 1/2॥
 
From him, all the creation and destruction etc. manifest. He is the penance, the sacrifice and the sacrifice, he is the ancient Virat Purush, he is called Aniruddha. From him, the creation and destruction of the worlds take place. ॥15 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)