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mahabharat 12.341.12-13h: श्री हरि, जिनकी कृपा से ब्रह्मा प्रकट हुए और जिनके क्रोध से रुद्र प्रकट हुए, वे ही सम्पूर्ण जड़-चेतन जगत की उत्पत्ति के कारण हैं ॥12 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.341: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको अपने प्रभावका वर्णन करते हुए अपने नामोंकी व्युत्पत्ति एवं माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 341: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको अपने प्रभावका वर्णन करते हुए अपने नामोंकी व्युत्पत्ति एवं माहात्म्य बताना  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  12.341.12-13h 
यस्य प्रसादजो ब्रह्मा रुद्रश्च क्रोधसम्भव:॥ १२॥
योऽसौ योनिर्हि सर्वस्य स्थावरस्य चरस्य च।
 
 
अनुवाद
श्री हरि, जिनकी कृपा से ब्रह्मा प्रकट हुए और जिनके क्रोध से रुद्र प्रकट हुए, वे ही सम्पूर्ण जड़-चेतन जगत की उत्पत्ति के कारण हैं ॥12 1/2॥
 
Shri Hari, by whose grace Brahma appeared and by whose anger Rudra appeared, is the reason behind the origin of the entire animate and inanimate world. ॥12 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)