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mahabharat 12.341.11-12h: तात! मैं तुम्हें उन नामों की उत्पत्ति बताता हूँ, क्योंकि प्राचीन काल से ही तुम मेरे शरीर का आधा भाग माने गए हो। जो परम तेजस्वी, निराकार और पुण्यमय विश्वात्मा हैं, जो समस्त देहधारियों के परम आत्मा हैं, उन भगवान नारायणदेव को नमस्कार है। 11 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.341: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको अपने प्रभावका वर्णन करते हुए अपने नामोंकी व्युत्पत्ति एवं माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 341: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको अपने प्रभावका वर्णन करते हुए अपने नामोंकी व्युत्पत्ति एवं माहात्म्य बताना  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  12.341.11-12h 
कथ्यमानं मया तात त्वं हि मेऽर्धं स्मृत: पुरा।
नमोऽतियशसे तस्मै देहिनां परमात्मने॥ ११॥
नारायणाय विश्वाय निर्गुणाय गुणात्मने।
 
 
अनुवाद
तात! मैं तुम्हें उन नामों की उत्पत्ति बताता हूँ, क्योंकि प्राचीन काल से ही तुम मेरे शरीर का आधा भाग माने गए हो। जो परम तेजस्वी, निराकार और पुण्यमय विश्वात्मा हैं, जो समस्त देहधारियों के परम आत्मा हैं, उन भगवान नारायणदेव को नमस्कार है। 11 1/2॥
 
Tat! I will tell you the origin of those names, because since ancient times you have been considered half of my body. Salutations to Lord Narayandev, the most glorious, formless and virtuous universal soul, who is the supreme soul of all embodied beings. 11 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)