Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.340.93-94: उस समय परम पराक्रमी भगवान हयग्रीव को देखकर सम्पूर्ण जगत् के कल्याण की इच्छा से जगत् के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने सिर झुकाकर उन्हें प्रणाम किया और उस वरदाता देवता के समक्ष हाथ जोड़कर खड़े हो गए। तब भगवान ने उन्हें गले लगाकर उनसे ये वचन कहे॥93-94॥ | mahabharat अध्याय 12.340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस समय परम पराक्रमी भगवान हयग्रीव को देखकर सम्पूर्ण जगत् के कल्याण की इच्छा से जगत् के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने सिर झुकाकर उन्हें प्रणाम किया और उस वरदाता देवता के समक्ष हाथ जोड़कर खड़े हो गए। तब भगवान ने उन्हें गले लगाकर उनसे ये वचन कहे॥93-94॥
At that time, having seen the immensely powerful Lord Hayagriva, with the desire of welfare of the entire world, Lord Brahma, the creator of the world, bowed his head and saluted him and stood with folded hands before that boon-giving deity. Then the Lord embraced him and told him these words.॥93-94॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥