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mahabharat 12.340.91: स्वर्ग के देवताओं के चले जाने पर ब्रह्माजी ही वहाँ खड़े रहे। वे अनिरुद्धरूपी भगवान हरि के दर्शन करना चाहते थे ॥91॥   |   mahabharat अध्याय 12.340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  12.340.91 
गतेषु त्रिदिवौक:सु ब्रह्मैक: पर्यवस्थित:।
दिदृक्षुर्भगवन्तं तमनिरुद्धतनौ स्थितम्॥ ९१॥
 
 
अनुवाद
स्वर्ग के देवताओं के चले जाने पर ब्रह्माजी ही वहाँ खड़े रहे। वे अनिरुद्धरूपी भगवान हरि के दर्शन करना चाहते थे ॥91॥
 
After the heavenly deities left, Brahmaji alone remained standing there. He wanted to have the darshan of Lord Hari in the form of Aniruddha. ॥91॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)