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mahabharat 12.340.90: व्यासजी कहते हैं - शिष्यों! भगवान् का यह उपदेश पाकर ऋषियों सहित देवतागण उन्हें प्रणाम करके अपने इच्छित देशों को चले गये।   |   mahabharat अध्याय 12.340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 90
 
 
श्लोक  12.340.90 
व्यास उवाच
तेऽनुशिष्टा भगवता देवा: सर्षिगणास्तथा।
नमस्कृत्वा भगवते जग्मुर्देशान् यथेप्सितान्॥ ९०॥
 
 
अनुवाद
व्यासजी कहते हैं - शिष्यों! भगवान् का यह उपदेश पाकर ऋषियों सहित देवतागण उन्हें प्रणाम करके अपने इच्छित देशों को चले गये।
 
Vyasa says - Disciples! After receiving this advice from the Lord, the gods along with the sages bowed to him and went to their desired countries.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)