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mahabharat 12.340.81: हे सुरेशश्रेष्ठगण! आप जीवों को उनके कर्मानुसार गति, उन कर्मों के अनुसार गति तथा नियत समय तक उनकी आयु प्रदान करते हैं॥81॥   |   mahabharat अध्याय 12.340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  12.340.81 
प्रदिश्यन्तां च कर्माणि प्राणिनां गतयस्तथा।
परिनिष्ठितकालानि आयूंषीह सुरोत्तमा:॥ ८१॥
 
 
अनुवाद
हे सुरेशश्रेष्ठगण! आप जीवों को उनके कर्मानुसार गति, उन कर्मों के अनुसार गति तथा नियत समय तक उनकी आयु प्रदान करते हैं॥81॥
 
'Sureshresthagan! You grant the living beings according to their deeds, the speed they get according to those deeds and their life span till the appointed time. 81॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)