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mahabharat 12.340.74: वे योग के प्रमुख विद्वान, सांख्य विद्या के विशेषज्ञ, धर्मग्रंथों के आचार्य और मोक्षधर्म के प्रवर्तक हैं॥ 74॥   |   mahabharat अध्याय 12.340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  12.340.74 
एते योगविदो मुख्या: सांख्यज्ञानविशारदा:।
आचार्या धर्मशास्त्रेषु मोक्षधर्मप्रवर्तका:॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
वे योग के प्रमुख विद्वान, सांख्य विद्या के विशेषज्ञ, धर्मग्रंथों के आचार्य और मोक्षधर्म के प्रवर्तक हैं॥ 74॥
 
‘He is a leading scholar of Yoga, an expert in the knowledge of Sankhya, an Acharya of religious texts and the promoter of the religion of Moksha.॥ 74॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)