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mahabharat 12.340.7: जनमेजय बोले - मुने ! ब्रह्मा, देवता, दानव और मनुष्य आदि ये सभी लोग संसार-उन्नति के लिए नियत कर्मों में तल्लीन दिखाई देते हैं ॥7॥   |   mahabharat अध्याय 12.340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.340.7 
जनमेजय उवाच
इमे सब्रह्मका लोका: ससुरासुरमानवा:।
क्रियास्वभ्युदयोक्तासु सक्ता दृश्यन्ति सर्वश:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय बोले - मुने ! ब्रह्मा, देवता, दानव और मनुष्य आदि ये सभी लोग संसार-उन्नति के लिए नियत कर्मों में तल्लीन दिखाई देते हैं ॥7॥
 
Janmejaya said – Mune! All these people including Brahma, gods, demons and humans are seen to be engrossed in the activities prescribed for worldly ascension. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)