Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.340.63-64h: ‘यज्ञ में भाग लेकर तथा उसका फल यजमान को देकर, अपने अधिकार के अनुसार सबकी इच्छाओं का विचार करके सबको समृद्ध बनाना चाहिए। ॥63 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 63-64h
 
 
श्लोक  12.340.63-64h 
यूयं लोकान् भावयध्वं यज्ञभागफलोचिता:॥ ६३॥
सर्वार्थचिन्तका लोके यथाधीकारनिर्मिता:।
 
 
अनुवाद
‘यज्ञ में भाग लेकर तथा उसका फल यजमान को देकर, अपने अधिकार के अनुसार सबकी इच्छाओं का विचार करके सबको समृद्ध बनाना चाहिए। ॥63 1/2॥
 
‘By participating in the yajna and giving its fruits to the host, you should make everyone prosper by thinking about everyone's desires according to your rights. ॥ 63 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)