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mahabharat 12.340.56: इसी प्रकार देवताओं और ऋषियों ने भी भगवान् के लिए अपना-अपना भाग निश्चित किया। सत्ययुग के न्यायानुसार निश्चित किए गए वे उत्तम यज्ञ भाग सभी के द्वारा अत्यंत आदरपूर्वक माने गए ॥56॥   |   mahabharat अध्याय 12.340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  12.340.56 
देवा देवर्षयश्चैव स्वं स्वं भागमकल्पयन्।
ते कार्तयुगधर्माणो भागा: परमसत्कृता:॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार देवताओं और ऋषियों ने भी भगवान् के लिए अपना-अपना भाग निश्चित किया। सत्ययुग के न्यायानुसार निश्चित किए गए वे उत्तम यज्ञ भाग सभी के द्वारा अत्यंत आदरपूर्वक माने गए ॥56॥
 
In the same way, the gods and sages also decided their respective shares for the Lord. Those excellent shares of sacrifices, decided according to the justice of the Satya Yuga, were highly respected by all. ॥ 56॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)