Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.340.54-55: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! देवाधिदेव भगवान नारायण के ये वचन सुनकर सबके रोम-रोम हर्ष से खिल उठे। तत्पश्चात उन सभी देवताओं, ऋषियों और ब्रह्माजी ने वेदानुसार वैष्णव यज्ञ का अनुष्ठान किया। उस यज्ञ में स्वयं भगवान ब्रह्मा ने भगवान के लिए भाग निश्चित किया। 54-55॥ | mahabharat अध्याय 12.340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन उवाच
श्रुत्वैतद् देवदेवस्य वाक्यं हृष्टतनूरुहा:।
ततस्ते विबुधा: सर्वे ब्रह्मा ते च महर्षय:॥ ५४॥
वेददृष्टेन विधिना वैष्णवं क्रतुमाहरन्।
तस्मिन् सत्रे सदा ब्रह्मा स्वयं भागमकल्पयत्॥ ५५॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! देवाधिदेव भगवान नारायण के ये वचन सुनकर सबके रोम-रोम हर्ष से खिल उठे। तत्पश्चात उन सभी देवताओं, ऋषियों और ब्रह्माजी ने वेदानुसार वैष्णव यज्ञ का अनुष्ठान किया। उस यज्ञ में स्वयं भगवान ब्रह्मा ने भगवान के लिए भाग निश्चित किया। 54-55॥
Vaishampayanji says – Janamejaya! Hearing these words of Devadhidev Lord Narayana, everyone's hair blossomed with joy. Thereafter, all those gods, sages and Brahmaji performed the Vaishnav Yagya ritual as per the Vedas. In that yagya, Lord Brahma himself decided the share for God. 54-55॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥