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mahabharat 12.340.52: सम्पूर्ण जगत् के ये महान गुरु, लोकपितामह ब्रह्मा और आप सभी महान देवता एकाग्रचित्त होकर यज्ञों के द्वारा मेरी पूजा करें ॥52॥   |   mahabharat अध्याय 12.340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  12.340.52 
एष ब्रह्मा लोकगुरुर्महान् लोकपितामह:।
यूयं च विबुधश्रेष्ठा मां यजध्वं समाहिता:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
सम्पूर्ण जगत् के ये महान गुरु, लोकपितामह ब्रह्मा और आप सभी महान देवता एकाग्रचित्त होकर यज्ञों के द्वारा मेरी पूजा करें ॥52॥
 
May this great Guru of the entire world, Lokpitamah Brahma and all you great gods be concentrated and worship me through yagyas. 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)