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mahabharat 12.340.46: वहाँ ब्रह्माजी के आदेशानुसार उन सबने वेदविधिपूर्वक तप आरम्भ किया। उनका वह महान् तप सब तपों में सबसे कठोर था। 46॥   |   mahabharat अध्याय 12.340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  12.340.46 
ते तप: समुपातिष्ठन् ब्रह्मोक्तं वेदकल्पितम्।
स महानियमो नाम तपश्चर्यासु दारुण:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
वहाँ ब्रह्माजी के आदेशानुसार उन सबने वेदविधिपूर्वक तप आरम्भ किया। उनका वह महान् तप सब तपों में सबसे कठोर था। 46॥
 
There, as per Brahmaji's instructions, they all started penance as per the Vedas. That great rule of his was the harshest of all penances. 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)