श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  12.340.43 
लोकत्रयस्य कृत्स्नस्य कथं कार्य: परिग्रह:।
कथं बलक्षयो न स्याद् युष्माकं ह्यात्मनश्च मे॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
तीनों लोकों का अधिकृत कार्य किस प्रकार सम्पन्न हो तथा आपकी और मेरी दोनों शक्तियाँ किस प्रकार नष्ट न हों? ॥43॥
 
How can the authorized work of the three worlds be accomplished and how should both your and my powers not be wasted? ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)