Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.340.39-40: (और उसने इस प्रकार कहा—) 'प्रभो! पितामह! आप महान् प्रभावशाली हैं। आपने ही हमें उत्पन्न किया है। हममें से जिसे भी आपके द्वारा बताया गया कोई भी धर्म या कार्य तथा धन प्राप्ति का कोई भी धर्म करना हो, अहंकारी कर्ता उसका पालन कैसे कर सकता है?॥ 39-40॥ | mahabharat अध्याय 12.340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वयं सृष्टा हि भगवंस्त्वया च प्रभविष्णुना।
येन यस्मिन्नधीकारे वर्तितव्यं पितामह॥ ३९॥
योऽसौ त्वयाभिनिर्दिष्टो ह्यधिकारोऽर्थचिन्तक:।
परिपाल्य: कथं तेन साहंकारेण कर्तृणा॥ ४०॥
अनुवाद
(और उसने इस प्रकार कहा—) 'प्रभो! पितामह! आप महान् प्रभावशाली हैं। आपने ही हमें उत्पन्न किया है। हममें से जिसे भी आपके द्वारा बताया गया कोई भी धर्म या कार्य तथा धन प्राप्ति का कोई भी धर्म करना हो, अहंकारी कर्ता उसका पालन कैसे कर सकता है?॥ 39-40॥
(And he said thus—) 'Lord! Grandfather! You are very influential. You have created us. Whoever amongst us has to engage in whichever right or task and whichever right for achieving wealth has been instructed by you, how can it be followed by an egoistic doer?॥ 39-40॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥