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mahabharat 12.340.38: एकादश रुद्र, आठ प्राकृत तथा समस्त देव ऋषिगण, जो जगत की रक्षा के लिए उत्पन्न हुए थे, ब्रह्माजी की सेवा में उपस्थित हुए।   |   mahabharat अध्याय 12.340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  12.340.38 
ते रुद्रा: प्रकृतिश्चैव सर्वे चैव सुरर्षय:।
उत्पन्ना लोकसिद्धॺर्थं ब्रह्माणं समुपस्थिता:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
एकादश रुद्र, आठ प्राकृत तथा समस्त देव ऋषिगण, जो जगत की रक्षा के लिए उत्पन्न हुए थे, ब्रह्माजी की सेवा में उपस्थित हुए।
 
‘The eleven Rudras, eight Prakrits and all the sages of the gods, who were born to protect the world, appeared before Brahma in his service.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)