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mahabharat 12.340.37: ब्रह्मा के क्रोध से रुद्र उत्पन्न हुए हैं। उन्हीं रुद्र ने दस अन्य रुद्रों को उत्पन्न किया है। इस प्रकार ये ग्यारह रुद्र हैं, जो विकारपुरुष माने जाते हैं॥ 37॥   |   mahabharat अध्याय 12.340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  12.340.37 
रुद्रो रोषात्मको जातो दशान्यान् सोऽसृजत् स्वयम्।
एकादशैते रुद्रास्तु विकारपुरुषा: स्मृता:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मा के क्रोध से रुद्र उत्पन्न हुए हैं। उन्हीं रुद्र ने दस अन्य रुद्रों को उत्पन्न किया है। इस प्रकार ये ग्यारह रुद्र हैं, जो विकारपुरुष माने जाते हैं॥ 37॥
 
‘Rudra has emerged from Brahma's anger. That Rudra himself has created ten other Rudras. Thus these are the eleven Rudras, who are considered as Vikarapurush.॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)