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mahabharat 12.340.34: मरीचि, अंगिरा, अत्रि, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, महात्मा वशिष्ठ और स्वायम्भुव मनु। 34॥   |   mahabharat अध्याय 12.340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  12.340.34 
मरीचिरङ्गिराश्चात्रि: पुलस्त्य: पुलह: क्रतु:।
वसिष्ठश्च महात्मा वै मनु: स्वायम्भुवस्तथा॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
मरीचि, अंगिरा, अत्रि, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, महात्मा वशिष्ठ और स्वायम्भुव मनु। 34॥
 
'Marichi, Angira, Atri, Pulastya, Pulah, Kratu, Mahatma Vashishtha and Swayambhuva Manu. 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)