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mahabharat 12.340.33: अहंकाररूपी ब्रह्मा ने पंचमहाभूतों की रचना की और फिर उनके शब्द, स्पर्श आदि गुणों को उत्पन्न किया। उन भूतों से जो मूर्तिरूपी प्राणी उत्पन्न हुए, उनके नाम सुनो॥33॥   |   mahabharat अध्याय 12.340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  12.340.33 
महाभूतानि सृष्ट्वैव तान् गुणान् निर्ममे पुन:।
भूतेभ्यश्चैव निष्पन्ना मूर्तिमन्तश्च तान् शृणु॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
अहंकाररूपी ब्रह्मा ने पंचमहाभूतों की रचना की और फिर उनके शब्द, स्पर्श आदि गुणों को उत्पन्न किया। उन भूतों से जो मूर्तिरूपी प्राणी उत्पन्न हुए, उनके नाम सुनो॥33॥
 
'Brahma, in the form of ego, created the five great elements and then created their qualities like word, touch etc. Listen to the names of the idol-like beings who were born from those ghosts. 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)