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mahabharat 12.340.32: ‘पृथ्वी, वायु, आकाश, जल और अग्नि – ये पाँच सूक्ष्म तत्त्व अहंकार से उत्पन्न हुए हैं।॥ 32॥   |   mahabharat अध्याय 12.340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  12.340.32 
पृथिवी वायुराकाशमापो ज्योतिश्च पञ्चमम्।
अहंकार प्रसूतानि महाभूतानि पञ्चधा॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
‘पृथ्वी, वायु, आकाश, जल और अग्नि – ये पाँच सूक्ष्म तत्त्व अहंकार से उत्पन्न हुए हैं।॥ 32॥
 
‘Earth, air, sky, water and fire – these five subtle elements have originated from the ego.॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)