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mahabharat 12.340.31: ‘वही अनिरुद्ध, जो व्यक्त अवस्था को प्राप्त हो चुका था, उसने पितामह ब्रह्मा को उत्पन्न किया। वह ब्रह्मा पूर्णतः तेजोमय है और उसे विश्वात्मा अहंकार कहते हैं।॥31॥   |   mahabharat अध्याय 12.340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  12.340.31 
योऽसौ व्यक्तत्वमापन्नो निर्ममे च पितामहम्।
सोऽहंकार इति प्रोक्त: सर्वतेजोमयो हि स:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
‘वही अनिरुद्ध, जो व्यक्त अवस्था को प्राप्त हो चुका था, उसने पितामह ब्रह्मा को उत्पन्न किया। वह ब्रह्मा पूर्णतः तेजोमय है और उसे विश्वात्मा अहंकार कहते हैं।॥31॥
 
‘The same Aniruddha, who had attained the state of being expressed, created the grandfather Brahma. That Brahma is completely radiant and he is called the universal ego.॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)