श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.340.30 
अव्यक्ताद् व्यक्तमुत्पन्नं लोकसृष्टॺर्थमीश्वरात्।
अनिरुद्धो हि लोकेषु महानात्मेति कथ्यते॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
‘संसार की रचना के लिए उस महापुरुष और अव्यक्त से एक पुरुष उत्पन्न हुआ, जो सम्पूर्ण लोकों में अनिरुद्ध और महान् आत्मा कहा जाता है ॥30॥
 
‘For the creation of the world, a person was born from that great man and the unmanifested one, who is called Aniruddha and great soul in all the worlds. 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)