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mahabharat 12.340.28-29: ‘मैं तुम्हें वह सब घटनाएँ बता रहा हूँ जो कल्प के आदि में घटित हुई थीं और जिन्हें मैंने ज्ञान-दृष्टि से देखा था। जिसे सांख्य और योग के विद्वान् लोग परमात्मा कहते हैं, वही अपने कर्मों के प्रभाव से महापुरुष नाम धारण करता है। उसी से अव्यक्त की उत्पत्ति हुई है, जिसे विद्वान् लोग पुरुषप्रधान भी कहते हैं।॥ 28-29॥   |   mahabharat अध्याय 12.340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 28-29
 
 
श्लोक  12.340.28-29 
यथा वृत्तं हि कल्पादौ दृष्टं मे ज्ञानचक्षुषा।
परमात्मेति यं प्राहु: सांख्ययोगविदो जना:॥ २८॥
महापुरुषसंज्ञां स लभते स्वेन कर्मणा।
तस्मात् प्रसूतमव्यक्तं प्रधानं तं विदुर्बुधा:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
‘मैं तुम्हें वह सब घटनाएँ बता रहा हूँ जो कल्प के आदि में घटित हुई थीं और जिन्हें मैंने ज्ञान-दृष्टि से देखा था। जिसे सांख्य और योग के विद्वान् लोग परमात्मा कहते हैं, वही अपने कर्मों के प्रभाव से महापुरुष नाम धारण करता है। उसी से अव्यक्त की उत्पत्ति हुई है, जिसे विद्वान् लोग पुरुषप्रधान भी कहते हैं।॥ 28-29॥
 
‘I am telling you all the events that happened in the beginning of the Kalpa and which I saw with the vision of knowledge. The one whom the scholars of Sankhya and Yoga call Paramatma, he himself bears the name of Mahapurush due to the effect of his deeds. From him, the unmanifested has originated, whom the scholars also know as Purush Pradhan.॥ 28-29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)