Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.340.25: हे मुनियों में श्रेष्ठ शिष्य! एक समय मैंने भूत, वर्तमान और भविष्य - इन तीनों कालों का ज्ञान प्राप्त करने के लिए अत्यन्त कठोर तप किया था॥ 25॥ | mahabharat अध्याय 12.340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मया हि सुमहत् तप्तं तप: परमदारुणम्।
भूतं भव्यं भविष्यं च जानीयामिति सत्तमा:॥ २५॥
अनुवाद
हे मुनियों में श्रेष्ठ शिष्य! एक समय मैंने भूत, वर्तमान और भविष्य - इन तीनों कालों का ज्ञान प्राप्त करने के लिए अत्यन्त कठोर तप किया था॥ 25॥
'O best of disciples among the saints! Once upon a time, I performed very severe and difficult penance to acquire knowledge of the three times- the past, the present and the future.॥ 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥