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mahabharat 12.340.24: अपने शिष्यों के संशययुक्त वचन सुनकर सबके अज्ञानरूपी अंधकार को दूर करने वाले पराशरनन्दन श्री व्यासजी ने यह कहा- ॥24॥   |   mahabharat अध्याय 12.340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  12.340.24 
शिष्याणां वचनं श्रुत्वा सर्वाज्ञानतमोनुद:।
पराशरसुत: श्रीमान् व्यासो वाक्यमथाब्रवीत्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
अपने शिष्यों के संशययुक्त वचन सुनकर सबके अज्ञानरूपी अंधकार को दूर करने वाले पराशरनन्दन श्री व्यासजी ने यह कहा- ॥24॥
 
Hearing the doubtful words of his disciples, Parasharanandan Shri Vyasji, who removes the darkness of ignorance of all, said this - 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)