Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.340.20-21: ये पाँचों शिष्य इन्द्रियों और मन के संयम से युक्त, शुचिता और सदाचार से युक्त, क्रोध से रहित और जितेन्द्रिय हैं। व्यास जी ने अपनी सेवा में आए इन सभी शिष्यों को चारों वेदों और पाँचवें वेद महाभारत का अध्ययन कराया।   |   mahabharat अध्याय 12.340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 20-21
 
 
श्लोक  12.340.20-21 
एतान् समागतान् सर्वान् पञ्च शिष्यान् दमान्वितान्॥ २०॥
शौचाचारसमायुक्तान् जितक्रोधान् जितेन्द्रियान्।
वेदानध्यापयामास महाभारतपञ्चमान्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
ये पाँचों शिष्य इन्द्रियों और मन के संयम से युक्त, शुचिता और सदाचार से युक्त, क्रोध से रहित और जितेन्द्रिय हैं। व्यास जी ने अपनी सेवा में आए इन सभी शिष्यों को चारों वेदों और पाँचवें वेद महाभारत का अध्ययन कराया।
 
These five disciples are full of control of senses and mind, combined with cleanliness and good conduct, free from anger and Jitendriya. Vyas ji made all these disciples who came in his service to study the four Vedas and the fifth Veda Mahabharata.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)