श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  12.340.19-20h 
सुमन्तुर्जैमिनिश्चैव पैलश्च सुदृढव्रत:॥ १९॥
अहं चतुर्थ: शिष्यो वै पञ्चमश्च शुक: स्मृत:।
 
 
अनुवाद
सुमन्तु, जैमिनी, पैल इन तीनों के अतिरिक्त जो उत्तम व्रत का कठोरतापूर्वक पालन करता है, मैं व्यासजी का चौथा शिष्य हूँ और पाँचवाँ शिष्य उनके पुत्र शुकदेव माने जाते हैं ॥19 1/2॥
 
Apart from these three, Sumantu, Jaimini, Pail, who strictly observes the best fast, I am the fourth disciple of Vyasji and the fifth disciple is considered to be his son Shukdev. 19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)