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mahabharat 12.340.14: हे ब्राह्मण! यह संदेह मेरे हृदय में काँटे के समान चुभ रहा है। कृपया इतिहास बताकर मेरे संदेह का निवारण करें। मैं इस विषय को जानने के लिए अत्यंत उत्सुक हूँ।॥14॥   |   mahabharat अध्याय 12.340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.340.14 
एतन्मे संशयं विप्र हृदि शल्यमिवार्पितम्।
छिन्धीतिहासकथनात् परं कौतूहलं हि मे॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मण! यह संदेह मेरे हृदय में काँटे के समान चुभ रहा है। कृपया इतिहास बताकर मेरे संदेह का निवारण करें। मैं इस विषय को जानने के लिए अत्यंत उत्सुक हूँ।॥14॥
 
O Brahmin! This doubt pierces my heart like a thorn. Please dispel my doubts by telling me the history. I am very eager to know about this subject. ॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)