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mahabharat 12.340.115: कामनायुक्त मनुष्य अभीष्ट कामनाओं को प्राप्त करता है और दीर्घायु होता है। ब्राह्मण समस्त वेदों को जानता है और क्षत्रिय विजयी होता है ॥115॥   |   mahabharat अध्याय 12.340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 115
 
 
श्लोक  12.340.115 
कामान् कामी लभेत् कामं दीर्घं चायुरवाप्नुयात्।
ब्राह्मण: सर्ववेदी स्यात् क्षत्रियो विजयी भवेत्॥ ११५॥
 
 
अनुवाद
कामनायुक्त मनुष्य अभीष्ट कामनाओं को प्राप्त करता है और दीर्घायु होता है। ब्राह्मण समस्त वेदों को जानता है और क्षत्रिय विजयी होता है ॥115॥
 
A man with desires gets his desired wishes and attains a long life. A Brahmin knows all the Vedas and a Kshatriya becomes victorious. ॥115॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)