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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 112
 
 
श्लोक  12.340.112 
एतत् ते सर्वमाख्यातं यन्मां त्वं परिपृच्छसि।
एवं मेऽकथयद् राजन् पुरा द्वैपायनो गुरु:॥ ११२॥
 
 
अनुवाद
राजन! आपने मुझसे जो कुछ पूछा था, वह सब मैंने आपको बता दिया है। पूर्वकाल में मेरे गुरु व्यास ने भी मुझे यही उपदेश दिया था।
 
King! I have told you everything you asked me. In the past, my Guru Vyasa had given me the same advice. 112.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)