श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 109
 
 
श्लोक  12.340.109 
कथितं तच्च वै सर्वं मया पृष्टेन तत्त्वत:।
क्रियतां मद्वच: शिष्या: सेव्यतां हरिरीश्वर:।
गीयतां वेदशब्दैश्च पूज्यतां च यथाविधि॥ १०९॥
 
 
अनुवाद
शिष्यों! ये सब बातें मैंने तुम्हारे पूछने पर तुम्हें सत्यतापूर्वक बताई हैं। तुम मेरी बात मानो और परम प्रभु श्री हरि का भजन करो। वैदिक मन्त्रों द्वारा उनकी महिमा का गान करो और विधिपूर्वक उनकी पूजा करो॥109॥
 
Disciples! I have told you all these things in truth after you asked me. You should listen to me and worship the Supreme Lord Shri Hari. Sing His glories through the Vedic mantras and worship Him according to the prescribed method.॥109॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)