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mahabharat 12.340.104: जो सदा समुद्र में निवास करते हैं, जिनके केश मोती के समान हैं और जो समस्त प्राणियों को मोक्षमार्ग का उपदेश करते हैं, उन शान्त श्रीहरि को नमस्कार है॥104॥   |   mahabharat अध्याय 12.340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  12.340.104 
समुद्रवासिने नित्यं हरये मुञ्जकेशिने।
शान्ताय सर्वभूतानां मोक्षधर्मानुभाषिणे॥ १०४॥
 
 
अनुवाद
जो सदा समुद्र में निवास करते हैं, जिनके केश मोती के समान हैं और जो समस्त प्राणियों को मोक्षमार्ग का उपदेश करते हैं, उन शान्त श्रीहरि को नमस्कार है॥104॥
 
Salutations to the peaceful Sri Hari who always resides in the ocean, whose hair is like a pearl and who preaches the path of salvation to all living beings. 104॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)