श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान‍्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना  »  श्लोक 102
 
 
श्लोक  12.340.102 
महाभूताधिपतये रुद्राणां पतये तथा।
आदित्यपतये चैव वसूनां पतये तथा॥ १०२॥
 
 
अनुवाद
वे महान् तत्त्वों के स्वामी हैं, रुद्रों, आदित्यों और वसुओं के स्वामी हैं। उन्हें नमस्कार है ॥102॥
 
He is the lord of the great elements and the master of the Rudras, Adityas and the Vasus. Salute Him. ॥102॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)