Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.340.10-12: इसके अतिरिक्त ब्रह्मा, रुद्र और बलासुर का वध करने वाले बलवान इन्द्र और सूर्य, चन्द्रमा, वायु, अग्नि, वरुण, आकाश, पृथ्वी और जो भी अवशिष्ट देवता बताए गए हैं, क्या वे भगवान द्वारा रचित अपने मोक्षमार्ग को नहीं जानते? इसलिए हम उस मार्ग का आश्रय नहीं लेते जो स्थिर, क्षयरहित और अविनाशी है? 10-12॥ | mahabharat अध्याय 12.340: व्यासजीका अपने शिष्योंको भगवान्द्वारा ब्रह्मादि देवताओंसे कहे हुए प्रवृत्ति और निवृत्तिरूप धर्मके उपदेशका रहस्य बताना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
किं च ब्रह्मा च रुद्रश्च शक्रश्च बलभित् प्रभु:॥ १०॥
सूर्यस्ताराधिपो वायुरग्निर्वरुण एव च।
आकाशं जगती चैव ये च शेषा दिवौकस:॥ ११॥
प्रलयं न विजानन्ति आत्मन: परिनिर्मितम्।
ततस्तेनास्थिता मार्गं ध्रुवमक्षरमव्ययम्॥ १२॥
अनुवाद
इसके अतिरिक्त ब्रह्मा, रुद्र और बलासुर का वध करने वाले बलवान इन्द्र और सूर्य, चन्द्रमा, वायु, अग्नि, वरुण, आकाश, पृथ्वी और जो भी अवशिष्ट देवता बताए गए हैं, क्या वे भगवान द्वारा रचित अपने मोक्षमार्ग को नहीं जानते? इसलिए हम उस मार्ग का आश्रय नहीं लेते जो स्थिर, क्षयरहित और अविनाशी है? 10-12॥
Apart from this, do not the powerful Indra and the Sun, who killed Brahma, Rudra and Balasura, the star Moon, Vayu, Agni, Varun, Sky, Earth and all those mentioned as residual gods, know their path of salvation created by God? So that we do not take refuge in the path that is stable, decayless and imperishable? 10-12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥