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mahabharat 12.34.32: हे भरतनन्दन! मैंने ये सब कर्म बता दिए, इन्हें करने वाला मनुष्य किसी पाप का भागी नहीं होता। अब मैं प्रायश्चित का विस्तारपूर्वक वर्णन करूँगा॥32॥   |   mahabharat अध्याय 12.34: जिन कर्मोंके करने और न करनेसे कर्ता प्रायश्चित्तका भागी होता और नहीं होता—उनका विवेचन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 34: जिन कर्मोंके करने और न करनेसे कर्ता प्रायश्चित्तका भागी होता और नहीं होता—उनका विवेचन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  12.34.32 
उक्तान्येतानि कर्माणि यानि कुर्वन्न दुष्यति।
प्रायश्चित्तानि वक्ष्यामि विस्तरेणैव भारत॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
हे भरतनन्दन! मैंने ये सब कर्म बता दिए, इन्हें करने वाला मनुष्य किसी पाप का भागी नहीं होता। अब मैं प्रायश्चित का विस्तारपूर्वक वर्णन करूँगा॥32॥
 
O Bharatanandan! I have described all these deeds, the person who does them is not guilty of any sin. Now I will describe the atonement in detail. ॥ 32॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि प्रायश्चित्तीये चतुस्त्रिंशोऽध्याय:॥ ३४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें प्रायश्चित्तके प्रकरणमें चौंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३४॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)