Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.34.31: यदि सोम रस का सार जानकर उसे बेचा जाए, तो विक्रेता को कोई दोष नहीं लगता। काम करने में असमर्थ नौकर को त्यागने में कोई दोष नहीं है। गायों की सुविधा के लिए जंगल में आग लगाने में कोई पाप नहीं है। | mahabharat अध्याय 12.34: जिन कर्मोंके करने और न करनेसे कर्ता प्रायश्चित्तका भागी होता और नहीं होता—उनका विवेचन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदि सोम रस का सार जानकर उसे बेचा जाए, तो विक्रेता को कोई दोष नहीं लगता। काम करने में असमर्थ नौकर को त्यागने में कोई दोष नहीं है। गायों की सुविधा के लिए जंगल में आग लगाने में कोई पाप नहीं है।
If Som Rasa is sold after knowing its essence, then the seller is not guilty. There is no fault in abandoning a servant who is unable to work. There is no sin in setting fire to a forest for the convenience of cows.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥