Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.34.30: यदि व्यभिचारिणी स्त्री का तिरस्कार किया जाए तो वह दोष की बात नहीं है। उस निन्दा से स्त्री पवित्र हो जाती है और पति को भी दोष नहीं लगता। 30॥ | mahabharat अध्याय 12.34: जिन कर्मोंके करने और न करनेसे कर्ता प्रायश्चित्तका भागी होता और नहीं होता—उनका विवेचन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदि व्यभिचारिणी स्त्री का तिरस्कार किया जाए तो वह दोष की बात नहीं है। उस निन्दा से स्त्री पवित्र हो जाती है और पति को भी दोष नहीं लगता। 30॥
If an adulterous woman is despised then it is not a matter of blame. By that reproach, the woman is purified and the husband also does not bear the blame. 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥