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mahabharat 12.34.27: यदि बड़ा भाई पापी हो जाए या संन्यास ले ले, तो छोटे भाई का अविवाहित रहने पर भी विवाह करना दोष नहीं है। यदि कोई स्त्री संतान प्राप्ति के लिए प्रार्थना करती है और किसी अन्य स्त्री के साथ संभोग करती है, तो इससे धर्म का लोप नहीं होता।   |   mahabharat अध्याय 12.34: जिन कर्मोंके करने और न करनेसे कर्ता प्रायश्चित्तका भागी होता और नहीं होता—उनका विवेचन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.34.27 
पारिवित्त्यं तु पतिते नास्ति प्रव्रजिते तथा।
भिक्षिते पारदार्यं च तद् धर्मस्य न दूषकम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
यदि बड़ा भाई पापी हो जाए या संन्यास ले ले, तो छोटे भाई का अविवाहित रहने पर भी विवाह करना दोष नहीं है। यदि कोई स्त्री संतान प्राप्ति के लिए प्रार्थना करती है और किसी अन्य स्त्री के साथ संभोग करती है, तो इससे धर्म का लोप नहीं होता।
 
If the elder brother becomes a sinner or takes up Sanyas, then it is not a fault for the younger brother to get married even if he remains unmarried. If a woman prays for a child and has sexual intercourse with another woman, then it does not lead to the extinction of Dharma.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)