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mahabharat 12.34.21: कुन्तीनन्दन! यही बात अन्य सभी अभक्ष्य पदार्थों के विषय में भी कही गई है। पश्चाताप करने से सब कुछ शुद्ध हो जाता है। 21॥   |   mahabharat अध्याय 12.34: जिन कर्मोंके करने और न करनेसे कर्ता प्रायश्चित्तका भागी होता और नहीं होता—उनका विवेचन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.34.21 
एतत् ते सर्वमाख्यातं कौन्तेयाभक्ष्यभक्षणम्।
प्रायश्चित्तविधानेन सर्वमेतेन शुद्धॺति॥ २१॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीनन्दन! यही बात अन्य सभी अभक्ष्य पदार्थों के विषय में भी कही गई है। पश्चाताप करने से सब कुछ शुद्ध हो जाता है। 21॥
 
Kuntinandan! The same thing has been said about all other non-food items also. By repenting everything becomes pure. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)