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mahabharat 12.34.1: युधिष्ठिर ने पूछा, "पितामह! कौन-से कर्म करने से मनुष्य प्रायश्चित का पात्र बनता है और कौन-सा प्रायश्चित करने से वह पापों से मुक्त हो जाता है? कृपया मुझे इस विषय में बताइए।"   |   mahabharat अध्याय 12.34: जिन कर्मोंके करने और न करनेसे कर्ता प्रायश्चित्तका भागी होता और नहीं होता—उनका विवेचन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 34: जिन कर्मोंके करने और न करनेसे कर्ता प्रायश्चित्तका भागी होता और नहीं होता—उनका विवेचन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.34.1 
युधिष्ठिर उवाच
कानि कृत्वेह कर्माणि प्रायश्चित्तीयते नर:।
किं कृत्वा मुच्यते तत्र तन्मे ब्रूहि पितामह॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, "पितामह! कौन-से कर्म करने से मनुष्य प्रायश्चित का पात्र बनता है और कौन-सा प्रायश्चित करने से वह पापों से मुक्त हो जाता है? कृपया मुझे इस विषय में बताइए।"
 
Yudhishthira asked, "Grandfather! By committing which deeds a man becomes eligible for atonement and by doing which atonement for them he becomes free from sins? Kindly tell me about this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)