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mahabharat 12.339.96-97: गिरिव्रज में जरासंध नाम का एक अत्यन्त वैभवशाली और बलशाली राक्षसराज होगा, जो समस्त राजाओं से शत्रुता करता रहेगा। वह भी मेरे ही बुद्धि-प्रयत्नों से मारा जा सकेगा॥ 96-97॥   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 96-97
 
 
श्लोक  12.339.96-97 
जरासंधश्च बलवान् सर्वराजविरोधन:॥ ९६॥
भविष्यत्यसुर: स्फीतो भूमिपालो गिरिव्रजे।
मम बुद्धिपरिस्पन्दाद् वधस्तस्य भविष्यति॥ ९७॥
 
 
अनुवाद
गिरिव्रज में जरासंध नाम का एक अत्यन्त वैभवशाली और बलशाली राक्षसराज होगा, जो समस्त राजाओं से शत्रुता करता रहेगा। वह भी मेरे ही बुद्धि-प्रयत्नों से मारा जा सकेगा॥ 96-97॥
 
In Girivraj, there will be a very prosperous and powerful demon king named Jarasandh, who will keep incurring enmity against all the kings. He too can be killed only by my intellectual efforts.॥ 96-97॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)