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mahabharat 12.339.86: त्रित, एकत और द्वित नामक ऋषि के साथ विश्वासघात करने के कारण प्रजापति के ये दोनों पुत्र वानरों के रूप में ऋषियों को प्राप्त होंगे ॥86॥   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  12.339.86 
त्रितोपघाताद् वैरूप्यमेकतोऽथ द्वितस्तथा।
प्राप्स्येते वानरत्वं हि प्रजापतिसुतावृषी॥ ८६॥
 
 
अनुवाद
त्रित, एकत और द्वित नामक ऋषि के साथ विश्वासघात करने के कारण प्रजापति के ये दोनों पुत्र वानरों के रूप में ऋषियों को प्राप्त होंगे ॥86॥
 
Due to betrayal of a sage named Trit, Ekat and Dwit, these two sons of Prajapati will be given to sages in the form of monkeys. 86॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)