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mahabharat 12.339.71: उस समय समस्त जीव-जगतको अपनेमें लीन करके मैं अकेला ही अपने ज्ञान और बलसे निर्जन लोकमें विचरण करूँगा॥ 71॥   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  12.339.71 
कृत्वाऽऽत्मस्थानि भूतानि स्थावराणि चराणि च।
एकाकी विद्यया सार्धं विहरिष्ये जगत‍् पुन:॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
उस समय समस्त जीव-जगतको अपनेमें लीन करके मैं अकेला ही अपने ज्ञान और बलसे निर्जन लोकमें विचरण करूँगा॥ 71॥
 
‘At that time, having absorbed all living and non-living creatures into myself, I alone will wander in the desolate world with my knowledge and power.॥ 71॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)