Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.339.67: ‘परम संन्यास तो समस्त कर्मों से मुक्त हो जाना है; अतः संन्यास प्राप्त पुरुष को चाहिए कि वह समस्त अंगों में सुखपूर्वक विचरण करे ॥ 67॥ | mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘परम संन्यास तो समस्त कर्मों से मुक्त हो जाना है; अतः संन्यास प्राप्त पुरुष को चाहिए कि वह समस्त अंगों में सुखपूर्वक विचरण करे ॥ 67॥
‘The ultimate retirement is to be free from all activities; therefore, one who has attained retirement should roam around happily in all the limbs.॥ 67॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥