Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.339.66: नारद! ये तथा अन्य अनेक सुन्दर वर ब्रह्माजी को देकर मैं सुखपूर्वक विदा हो गया॥ 66॥   |   mahabharat अध्याय 12.339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 339: श्वेतद्वीपमें नारदजीको भगवान् का दर्शन, भगवान् का वासुदेव-संकर्षण आदि अपने व्यूह स्वरूपोंका परिचय कराना और भविष्यमें होनेवाले अवतारोंके कार्योंकी सूचना देना और इस कथाके श्रवण-पठनका माहात्म्य  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  12.339.66 
एतांश्चान्यांश्च रुचिरान् ब्रह्मणेऽमिततेजसे।
अहं दत्त्वा वरान् प्रीतो निवृत्तिपरमोऽभवम्॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
नारद! ये तथा अन्य अनेक सुन्दर वर ब्रह्माजी को देकर मैं सुखपूर्वक विदा हो गया॥ 66॥
 
'Narad! Having given these and many other beautiful boons to the illustrious Brahma, I happily retired.॥ 66॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)